अध्याय १६

बाल्मीकि ऋषि बोले – इस प्रकार सुदेव शर्म्मा ने अपनी स्त्री गौतमी के वचन को सुन कर स्वस्थ हो हृदय में हरि भगवान्‌ के चरणों का ध्यान कर पुत्र से होने वाले शोक को जल्दी से त्याग दिया ॥ ४३ ॥

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पुरुषोत्तममासमाहात्म्ये श्रीनारायणनारदसंवादे दृढ़धन्वोपाख्याने सुदेवप्रतिबोधो नाम षोडशोऽध्यायः ॥ १६ ॥

बाल्मीकिरुवाच ॥ इति निजवनितावचो निशम्य प्रकृतिमुपागतवान्‌ सुदेवशर्मा ॥ हृदि हरिचणाम्बुजं निधायं झटिति जहौ शुचमात्मजाद्भवित्रीम्‌ ॥ ४३ ॥

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पुरुषोत्तममासमाहात्म्ये श्रीनारायणनारदसंवादे दृढधन्वोपाख्याने सुदेवप्रतिबोधो नाम षोडशोऽध्यायः ॥ १६ ॥

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