अध्याय २२

दृढ़धन्वा राजा बोला – हे तपोधन! पुरुषोत्तम मास के व्रतों के लिए विस्तार पूर्वक नियमों को कहिये। भोजन क्या करना चाहिये? और क्या नहीं करना चाहिये? और व्रती को व्रत में क्या मना है? विधान क्या है? ॥ १ ॥

श्रीनारायण बोले – इस प्रकार राजा दृढ़धन्वा ने बाल्मीकि मुनि से पूछा। बाद लोगों के कल्याण के लिए बाल्मीकि मुनि ने सम्मान पूर्वक राजा से कहा ॥ २ ॥

बाल्मीकि मुनि बोले – हे राजन्‌! पुरुषोत्तम मास में जो नियम कहे गये हैं। मुझसे कहे जानेवाले उन नियमों को संक्षेप में सुनिए ॥ ३ ॥

राजोवाच ॥ पुरुषोत्तमस्य नियमान्‌ व्रतिनां वद विस्तरात्‌ ॥ किं भोज्यं किमभोज्यं वा वर्ज्यावर्ज्ये तपोधन ॥ १ ॥

श्रीनारायण उवाच ॥ स एवं भगवान्‌ पृष्ठो भूभृता मुनिर्बाल्मिकिः ॥ पुंसां निःश्रेयसे नूनं तमाह बहु मानयन्‌ ॥ २ ॥

बाल्मीकिरुवाच ॥ पुरुषोत्तममासे ये नियमाः परिकीतिताः ॥ तान्‌ श्रृणुष्व मया राजन्‌ कथ्यमानान्‌ समासतः ॥ ३ ॥

हविष्यान्नंा च भुञ्जीातं प्रयतः पुरुषोत्तमे ॥ गोधूमाः शालयः सर्वाः सिता मुद्गा यवास्तिलाः ॥ ४ ॥

कलाय-कङ्गु नीवारा वास्तुकं हिमलोचिका ॥ आर्द्रकं कालशाकं च मूलं कन्दं च कर्कटीम्‌ ॥ ५ ॥

रम्भा सैन्धवसामुद्रे लवणे दधिसर्पिषी ॥ पयोऽनुद्‌धृतसारं च पनसाम्रे हरीतकी ॥ ६ ॥

नियम में स्थित होकर पुरुषोत्तम मास में हविष्यान्न भोजन करे। गेहूँ, चावल, मिश्री, मूँग, जौ, तिल ॥ ४ ॥

मटर, साँवा, तिन्नी का चावल, बथुवा, हिमलोचिका, अदरख, कालशाक, मूल, कन्द, ककड़ी ॥ ५ ॥

केला, सेंधा नोन, समुद्रनोन, दही, घी, बिना मक्खन निकाला हुआ दूध, कटहल, आम, हरड़, ॥ ६ ॥

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